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अमेरिकी सीनेट के रिपोर्ट पर इतना हो - हल्‍ला क्‍यों ?

Posted On: 13 Dec, 2014 Others में

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अमेरिका की के‍न्द्रिय खुफिया संस्‍था (सी.आई.ए.) के बारे में सीनेट के रिपोर्ट में 9/11 के हमलों के बाद पकड़े गये आतंकवादियों से सूचनाएं उगलवाने के लिए क्रूर तरीकों का अपनाये जाने का जिक्र किया गया है। जिसके कारण मानवाधिकार के तथाकथित पैरोकार बवाल मचाए हुए हैं। ऐसे तथाकथित लोग तब बवाल नहीं मचाते हैं, जब आतंकवादी लोगों के मौत के घाट उतारने के लिए क्रूरता से प्रहार करते हैं। मेरे विचार से सीआईए आतंकवादियों से सच उगलवाने के लिए जो भी तरीके अपनाती है, वो एकदम जायज है। आतंकवादियों से क्रूर तरीका नहीं अपनाया जाएगा तो क्‍या उसको पुचकारकर सच का तरीका उगलवाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार सीआईए के उच्‍चस्‍तरीय लक्ष्‍यों के लिए अकसर पाकिस्‍तान ही पूछताछ का पहला बिंदु होता था। सर्वविदित है कि पाकिस्‍तान आतंकवाद पैदा करने का फैक्‍ट्री है। भले ही इस बात को कई लोग न मानें लेकिन कई अन्‍तर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाएं मान चुकी है कि पाकिस्‍तान आतंकवाद के पोषक देशों में से एक है।
आतंकवादियों के संदर्भ में मानवाधिकार का समर्थन नहीं की जानी चाहिए। जो मानव ही नहीं है, उसको मानव का अधिकार क्‍यों मिलनी चाहिए? सभी देश देख रहे हैं कि अमेरिका में 9/11 के घटना के बाद दूसरी बार आतंकवा‍दी संगठन/व्‍यक्ति हमला करने का हिम्‍मत नहीं जुटा पाते हैं। आतंकवादी सी.आई.ए. के क्रूर रवैये से डरे हुए हैं। यदि इस प्रकार का विचार भी किया जाता है कि अमेरिका की उच्‍च तकनीक से लैश खुफिया एजेंसी तुरंत उसका पता लगा लेती है और उसके साथ जैसा व्‍यवहार की जानी चाहिए, करती है। इसी प्रकार जो भी देश आतंकवादी संगठनों/व्यक्तियों से क्रूरता से निबटी है, वहां पर आतंकवादी संगठन/व्‍यक्ति अपना सर उठाने का कोशिश नहीं करते हैं। श्रीलंका का भी उदाहरण देखा जा सकता है। लिट्टे को उसने क्रूरता से खत्‍म कर दिया। मानवाधिकार वाले हो-हल्‍ला मचाते रह गए। यदि श्रीलंका वैसा नहीं करते तो हमें नहीं लगता है कि कभी भी वे लिट्टे को खत्‍म कर पाते।

आतंकवादियों से निबटने के लिए मानवाधिकार की बात नहीं उठाया जाना चाहिए। जैसा को तैसा जैसा व्‍यवहार किया जाना चाहिए। तभी आतंकी घटना में कमी आ सकती है। भटके युवा मुख्‍यधारा में लौटेगें। मानवाधिकार पर बवाल मचा देने से आतंकवादियों को बल ही मिलता है न कि आतंकवादी सुधर कर मुख्‍यधारा में लौट जायेगें।

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