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नरेन्‍द्र मोदी पर निजी हमले शर्मनाक ............

Posted On: 9 May, 2014 Others में

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वाराणसी में जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है कि इससे तो यहीं लगता है कि वहां पर लोकसभा का निर्वाचन नहीं बल्कि कोई युद्ध होने वाला है। राजनीतिक पार्टियां के नेताअेां को जहां जनता से सम्‍पर्क करना चाहिए उसके बजाय अपने अपने शक्ति प्रदर्शन के फिराक में लगे हुए हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी संसदीय सीट के चुनाव में इस प्रकार का माहौल बना हुआ है। इससे न केवल जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है बल्कि धन का भी काफी अपव्‍यय हो रहा है। यदि सभी राजनीतिक पाटियों उन धनों का इस्‍तेमाल अपने शक्ति प्रदर्शन के बजाय अनेक नेक कार्यों में लगाऐगें तो बेशक उनसे हमारे देश की तरक्‍की ही होगी ।
इस बार के चुनाव में जिस तरीके से जनता के मुद्दे को गौण कर दिया गया है, वो काफी गंभीर विषय है। विभिन्‍न राजनीतिक पार्टि के जिम्‍मेदार नेता एक दूसरे पर गाली गलौज करने में ही लगे रहते हैं। वे जनता के लिए क्‍या करने वाले हैं, इस बात की जानकारी चुनावी सभाओं में बहुत ही कम राजनीतिक पार्टियों द्वारा ही दिया जा रहा है।
खासकर केन्‍द्र में सत्‍तासीन पार्टियां एवं उनको समर्थन करने वाले पार्टियों के जिम्‍मेदार के नेताअेां के गैर जिम्‍मेदाराना बयानों से तो यही स्‍पष्‍ट होता है कि उनके पास कोई खास एजेंडे जनता के लिए नहीं है। कांग्रेस व भाजपा विरोधि पार्टियां मुख्‍य विपक्षी पार्टी द्वारा घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार नरेन्‍द्र मोदी की ही निंदा करने में लगे रहते हैं। भाजपा विरोधि पार्टियों के चाल चलनों से तो यही कयास लगा जा सकते हैं वो जनता के लिए कोई खास योजनाओं की चर्चा करने के बजाय नरेन्‍द्र मोदी का ही विरोध करने में लगे रहते हैं। भाजपा विरोधि पार्टी जिस तरीके से नरेन्‍द्र मोदी के पीछे पड़ी हुई है उससे तो यही लगता है कि पिछले दस वर्षां से कांग्रेस की सरकार न होकर नरेन्‍द्र मोदी की ही सरकार है। जिस तरीके से एक व्‍यक्ति के पीछ पिलकर राजनीतिक पार्टियां पड़ी हुई है। वो काफी शर्मनाक है। राजनीतिक पार्टियों को नरेन्‍द्र मोदी के टारगेट करने के बजाय जनहित के बारे में जोरशोर से बात करनी चाहिए।



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